दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में ठंड की दस्तक के साथ ही वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। सुबह के समय छाई घने कोहरे और स्मॉग की चादर के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए राज्य सरकारों ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इसमें गैर-आवश्यक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक, डीजल गाड़ियों के संचालन पर नियंत्रण और स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं का निर्देश शामिल है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम की सैर से बचें और मास्क का प्रयोग करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने की घटनाओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर धूल, कूड़ा जलाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं का संचयन होने के कारण हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ी है। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए पड़ोसी राज्यों के बीच आपसी समन्वय और सौर ऊर्जा व इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना जरूरी है।
रविवार, 1 जून
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