राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत देश भर के स्कूली और उच्च शिक्षा प्रणालियों में बड़े बदलावों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। नए सत्र से लागू होने जा रहे इन बदलावों में मुख्य रूप से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के पैटर्न को अधिक लचीला और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि छात्रों पर परीक्षाओं का मानसिक तनाव कम किया जा सके।
शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, रटकर परीक्षा पास करने की पुरानी प्रणाली की जगह अब छात्रों के विश्लेषणात्मक कौशल और तार्किक सोच का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही, वोकेशनल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप जैसे नए विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, जिससे स्कूली स्तर से ही बच्चे आत्मनिर्भर बन सकें।
शिक्षक संघों और अभिभावकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में नए डिजिटल संसाधनों और बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने की मांग भी उठाई है ताकि सभी वर्गों के बच्चों को इन आधुनिक बदलावों का समान लाभ मिल सके।
रविवार, 1 जून
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